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Department Of Chemistry

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चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय, भिवानी में हिन्दी-विभाग की स्थापना सन् 2014 में हुई। विभाग में एम.ए. हिन्दी की कक्षाओं का अध्ययन-अध्यापन किया जाता है। विभागीय साहित्य-परिषद् के तत्त्वावधान में भारत के विश्वविद्यालयों के लब्धप्रतिष्ठ विद्वानों को आमंत्रित कर विद्यार्थि यों के ज्ञानवर्धन के लिए व्याख्यान-माला समय-समय पर आयोजित की जाती है। विभाग में विद्यार्थियो के बौद्धिक विकास के लिए एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी मार्गदर्शन किया जाता है। हिन्दी-विभाग में पाँच प्राध्यापक कार्यरत है। प्रोफेसर बाबूराम एम.ए., एम.फिल., पीएचडी. और डी.लिट् उपाधि प्राप्त है। डॉ. दीपक कुमारी एम.ए., एम.फिल., पीएच.डी. और नेट एवं डॉ. सुशीला एम.ए., एम.एड., एम.फिल., पीएच.डी और नेट उत्तीर्ण है। डॉ. महक एम.ए., पीएच.डी. और जे.आर.एफ. है। श्री धर्मवीर नेट पास है। विभागीय सभी प्राध्यापक शोधकार्य में निरंतर रत है और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानको को पूर्ण करते है। सभी प्राध्यापक राष्ट्रभाषा हिन्दी से जुड़कर एवं अन्तर्विद्यावर्ती शोध में रुचि रखते है। शोध के विविध प्रकार-भाषावैज्ञानिक शोध, शैलीवैज्ञानिक शोध, काव्यशास्त्रीय शोध, वैज्ञानिक शोध, लोकतात्त्विक शोध एवं पाठानुसंधान आदि में निरंतर सक्रिय है। बदलते परिवेश में विद्यार्थियो को शोध की नई तकनीक और समाज से जोड़कर आधुनिक विमर्शो-स्त्री विमर्श, किसान विमर्श, प्रवासी विमर्श, दलित विमर्श, आदिवासी विमर्श, किन्नर विमर्श, बाल विमर्श, वृद्ध विमर्श, वैश्विक महामारी विमर्श, विधि विमर्श,पर्यावरण विमर्श आदि को शोध में सम्मिलित करने का प्रयास है। राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्र-पत्रिकाओं में विभागीय शिक्षको के शोधपत्र प्रकाशित होते रहते है। वर्तमान संदर्भ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को क्रियान्वित करने में शोध की उपयोगिता और उसके महत्त्व को नवीनतम पाठ्यक्रम के माध्यम से आगे बढ़ा रहे है। विभाग में विद्यार्थियों में शोध के प्रति जिज्ञासा एवं जागरूकता उत्पन्न करने के लिए स्वाध्याय(मैसजिनकल) एवं संगोष्ठी(मैउपदंत) पाठ्यक्रम में निर्धारित है।शोध को केवल सूचना पर आधारित न रखकर भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ जोड़कर अध्ययन और अनुसंधान किया जा रहा है।

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